Tashahhud or Attahiyat in hindi | तशह्हुद या अत्तहिय्यात हिंदी में
तशह्हुद या अत्तहिय्यात क्या है?
तशह्हुद का मतलब होता है 'गवाही देना (ईमान की)' और इसे अत्तहिय्यात भी कहा जाता है।
नमाज में जब एक बंदा या बंदी दूसरी या आखरी रकात में किबला(पश्चिम) की तरफ रुख कर कर बैठता है और अल्लाह की बडाई बयान करता है और अल्लाह केे नबी और उसके नेकबंदो पर सलात व सलाम भेजता है और दो गवाहियाँ देता है, वही तशह्हुद या अत्तहिय्यात कहलाता है।
अत्तहिय्यात या तशह्हुद की दुआ
अरबी-
التَّحِيَّاتُ لِلّٰهِ، وَالصَّلَوْاتُ، وَالطَّيِّباتُ، السَّلاَمُ عَلَيْكَ أَيُّهَا النَّبِيُّ وَرَحْمَةُ اللّٰهِ وَبَرَكَاتُهُ، السَّلاَمُ عَلَيْنَا وَعَلَى عِبَادِ اللّٰهِ الصَّالِحِيْنَ، أَشْهَدُ أَنْ لاَ إِلَهَ إِلاَّ اللّٰهُ وَأَشْهَدُ أَنَّ مُحَمَّداً عَبْدُهُ وَرَسُوْلُهُ
*अत्तहियातु लिल्लाहि वस्सलावातु वत्तैयिबातु अस्सलामु अलैका अय्युहन नबिय्यु व रहमतुल्लाही व बरकातुहू अस्सलामु अलैना व अला इबादिल्लाहिस्सालिहीन* अशहदु अल्ला इलाहा इल्ललाहु व अशहदु अन्ना मुहम्मदन अब्दुहू व रसूलुहु *
नमाज़ में अत्तहिय्यात पढ़ने का सही तरीका – Attahiyat In Hindi For Namaz
जब तशह्हुद – tashahhud में कलिमा ला पर पहुँचे तो दाहिने हाथ की बीच की उंगली और अंगूठे का हल्क़ा बनाए ( यानी की सीधे हाथ की सबसे बढ़ी ऊँगली बीच वाली और अंगूठे के सिरे को मिलाले ) और लफ्ज़े ला पर कलिमे की उंगली उठाए यानी की अशहदु अल्ला {ला} पर सीधे हाथ की शहादत की ऊँगली इस तरह उठाना है की अंगूठा और बिच की सबसे बड़ी वाली उंगली के पेट दोनों मिलाना है ! और शहादत की ऊँगली ऊपर करना है। और इल्लल्लाहु पर गिरा दे !
फिर सब उंगली फौरन सीधी कर ले, अगर दो रकाअत ? वाली नमाज़ है ! तो फिर अत्तहिय्यात ( attahiyat ) के बाद दुरूद शरीफ़ और दुआ पढकर सलाम फेर दे ! आंर अगर तीन या चार रकाअत वाली नमाज़ है ! तो अत्तहिय्यात के बाद अल्लाहु अकबर कहकर खडा हो जाए !
अत्तहिय्यात क्या है ? What Is Attahiyat ?
आसमान मेँ अल्लाह और उसके रसूल हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहो अलैहि व सल्लम के दरमियान की मेअराज के वक्त की गुफ्तगु (बात-चीत ) को ही अत्तहिय्यात कहते है !
जब हमारे नबी हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैही वस्सल्लम अल्लाह से मुलाकात के लिए हाज़िर हुए । तो मुलाकात के वक्त रसूलअल्लाह सल्लल्लाहु अलैही वस्सल्लम ने अल्लाह तबारक वतआला से सलाम नही किया,
क्यूंकि हकीकत मे हम अल्लाह को सलाम पेश नहीँ कर सकते ! क्यूंकि तमाम सलामती अल्लाह की तरफ से है इसलिए हमारे नबी हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैही वस्सल्लम ने अल्लाह को सलाम न करते हुए यह फरमाया: –
“अत्तहिय्यातु लिल्लाही वस्सलवातु वत्तैयिबातु“
जिसका हिंदी तर्जुमा कि – तमाम बोल से अदा होने वाली और बदन से अदा होने वाली तमाम इबादते अल्लाह के लिए है
इसपर अल्लाह तबारक वतआला ने जवाब दिया-
अस्सलामु अलैका अय्युहन नबिय्यु व रहमतुल्लाही व बरकातुहू
जिसका हिंदी तर्जुमा कि – सलामती हो तूम पर या नबी, और रहम और बरकत हो !
हमारे नबी हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैही वस्सल्लम ने फरमाया:
अस्सलामु अलैना व अला इबादिल्लाहिस्सालिहीन
जिसका हिंदी तर्जुमा कि – सलामती हो हम पर और अल्लाह आपके नेक बन्दो पर
यहा गौर करो, नबी ने सलामती हो मुझ पर ऐसा नही कहा बल्की सलामती हो “हम पर” यानी उम्मत पर ऐसा कहा
यह सब वाकेआ “फरिश्तो” ने सूना और ये सब सुनकर फरिश्तो न अर्ज किया:-
अशहदु अल्ला इलाहा इल्ललाहु व अशहदु अन्ना मुहम्मदन अब्दुहू व रसूलुहु *
जिसका हिंदी तर्जुमा कि – हम गवाही देते है की, अल्लाह के सिवाह कोई इबादत के लायक नही है ! और हम गवाही देते है की, हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैही वस्सल्लम अल्लाह के नेक बन्दे और रसूल है