मय्यत को कफ़न पहनाने का तरीका | Madina Masjid Ahle Sunnat
मय्यत के गुस्ल देने के बाद बदन किसी पाक कपड़े से आहिस्ता से पोंछ ले ताकि कफ़न तर न हो और कफ़न को एक या तीन या पाँच या सात बार धूनी दे ले इससे ज्यादा नहीं फिर कफ़न यूँ बिछाए कि पहले बड़ी चादर फिर एजार (तहबन्द) फिर कफर्नी फिर मय्यित को उस पर लिटाए और
कफनी पहनाए और दाढ़ी और तमाम बदन पर खुश्बू मलें और मवाजए सुजूद यानी माथे नाक, हाथ, घुटने और कदम पर काफूर लगाए फिर एजार ( तहबन्द) लपेटे पहले वाएँ फिर दाएँ तरफ से फिर लिफाफा लपेटे पहले बाएँ फिर दाएँ तरफ से ताकि दाहिना ऊपर रहे और सर और पाँव की
तरफ बाँध दें कि उड़ने का डर न रहे औरत को कफ़न पहनाकर उसके बाल के दो हिस्से करके कफनी के ऊपर सीना के ऊपर डाल दे और ओढ़नी आधी पीठ के नीचे से बिछा कर सर पर लाकर मुँह पर मिस्ले नकाब के डाल दे कि सीना पर रहे कि इसकी लम्बी आधी पीठ से सीना तक
है और चौड़ायी एक कान की लौ से दुसरे कान की लौ तक और यह जो लोग किया करते हैं कि जिन्दगी की तरह उढ़ाते हैं, गलत व खिलाफे सुन्नत है फिर बदस्तूर जार व लिफाफा लपेटे फिर सबके ऊपर सौना बन्द पिस्तान के ऊपर से रान तक लाकर बाँधे ।
